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Saturday, 20 December 2014

जवाब तो था उनके पास मेरे हर सवाल का....
बस उनकी ख़ामोशी ही थी जो हर बार बस हर बार मुझे उनकी तरफ खीच लाती थी .....
मेरी फितरत में नहीं भावनाओं से खेलना....
वरना हम भी कब के आगे बड़ चुके होते ।।

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